Theatre of Relevance - An Artistic Movement !

"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" या तत्वज्ञानाचा आरंभ आणि सराव सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल भारद्वाज" यांनी 12 ऑगस्ट 1992 रोजी संपूर्ण जगभरात सुरु केला.
"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" तत्वानुसार, "प्रेक्षक" हा सर्वात सशक्त आणि पहिला रंगकर्मी आहे आणि त्यानंतर लेखक, दिगदर्शक आणि कलाकार.
"TOR" ची प्रक्रिया स्थापित रंगभूमीच्या मनोरंजनाची चौकट मोडून, रंगभूमी हि जगण्याचा सक्षम मार्ग आहे हे तत्व आणि दृष्टिकोन प्रेक्षकांमधे रुजवते. 
रंगभूमी हि सृजनात्मक बदल घडवून आणणारी प्रक्रिया आहे हे "TOR" ने आपल्या रचनात्मक आणि सकारात्मक प्रयोगांतून सिद्ध करून, संपूर्ण जगभरात क्रांतीचा ज्वालामुखी पेटवला आहे.
"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" हे तत्व, "कलेसाठी कला" या भांडवलशाहीच्या संधीसाधु आणि पलायनवादी भूमिकेला नाकारून, प्रतिबद्ध आणि जबाबदार, सृजनात्मक उत्कृष्टतेला प्राधान्य देऊन, एका उत्तम आणि सुंदर अशा मानवी विश्वाची रचना करण्यासाठी प्रेरीत आणि प्रतिबद्ध करते.





 “थिएटर ऑफ रेलेवेंस नाट्य सिद्धांत का सूत्रपात ,अभ्यास और क्रियान्वयन  सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल भारद्वाज"  12 अगस्त  1992 से वैश्विक स्तर पर कर रहे हैं . थिएटर ऑफ़ रेलेवंस  रंग सिद्धांत के अनुसार रंगकर्म निर्देशक और अभिनेता केन्द्रित  होने की बजाय दर्शक और लेखक केन्द्रित हो क्योंकि दर्शक सबसे बड़ा और शक्तिशाली रंगकर्मी है .
पूंजीवादी कलाकार कभी भी अपनी कलात्मक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं लेते इसलिए “कला कला के लिए” के चक्रव्यहू में फंसे हुए हैं और भोगवादी कला की चक्की में पिस कर ख़त्म हो जाते हैं .  थिएटर ऑफ़ रेलेवंस  ने “कला कला के लिए” वाली औपनिवेशिक और पूंजीवादी सोच के चक्रव्यहू को अपने तत्व और सार्थक प्रयोगों से तोड़ा (भेदा) है और दर्शक को जीवन को बेहतर और शोषण मुक्त बनाने वाली प्रतिबद्ध ,प्रगतिशील,समग्र और समर्पित रंग दृष्टी से जोड़ा है .
 थिएटर ऑफ़ रेलेवंस  अपने तत्व और सकारात्मक प्रयोगों से एक बेहतर , सुंदर और मानवीय विश्व के निर्माण के लिए सांस्कृतिक चेतना का निर्माण कर सांस्कृतिक क्रांति के लिए प्रतिबद्ध है !
 Theatre of Relevance (TOR) is a philosophy initiated & practiced by well known Theatre personality Manjul Bhardwaj since 12 August, 1992 in India and all over the world. Theatre of Relevance envisages audience as first, foremost & strongest theatre person and then writer, director, performer follows. TOR brings out theatre from the cocoons of Entertainment to a way of empowerment and sees theatre as a way of living. TOR has proved that theatre is a process of constructive change and a volcano of revolution with its experiments all over the world. TOR rubbishes capitalistic approach “art for art sake” as escapist & opportunistic and commits it`s creative excellence to make the world more “Better & Humane”.


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