Thursday, November 9, 2017

Classic plays “Garbh” and “Anhad Naad-Unheard Sounds of Universe” along with new play “Nyaya ke Bhanwar me Bhawari” Will be performed to Celebrate 25 years of “Theatre Of Relevance” philosophy "3-days Theatre Festival in Mumbai"


15, 16, 17 November, 2017
At Shivaji Mandir,Dadar (W) Mumbai

Epoch is created and wrought through contemplation. Contemplation, being generated from within you and crossing global horizons, survives in the world. Art make humans human. Artistic process & reflection alone possesses the capacity of soaking human poison. The period after 1990 has been an era of “Irrelevance” for the world. This has been a period of monopoly and dictatorship. A period of limiting the principles of science to technology alone. Today is the period of buying and selling. A period where media instead of being faithful to the people, is faithful to thy masters & rulers. In these threatening times, the “people” needs ‘contemplation’ for their issues and a platform for their concerns. ‘Theatre of Relevance” theatrical philosophy’ has evolved as a ‘contemplation platform’ for public concerns since 12th August, 1992 and has completed 25 years of its theatrical philosophy on 12th August, 2017. In these 25 years, ‘Theatre of Relevance’ has appropriated its global flight via streets, squares, villages, tribes, towns, and cities and has gained global acceptance.

Principles of Theatre of Relevance
1. A Theatre that commits its creative excellence to make the world more “Better & Humane”.
2. That is relevant to the context of the society and owes its social responsibility, not to Art just for the Art sake.
3. Which caters to human needs and provide itself as a platform for expression.
4. Which explores itself as a medium of change/development.
5. That comes out from the ' limits of entertainment ' to a way of living.

(“Theatre of Relevance” is initiated by Theatre Thinker “Manjul Bhardwaj” on August 12, 1992 and since then it is practiced and implemented at Indian and at international level.)

Today in the era of the destruction of nature in the name of development, it is a challenge for humans to be human. A 3-day ‘Theatre of Relevance-Theatre festival’ is being organized in Mumbai on 15,16, 17 November,2017 to connect you with your inner human sound through the medium of the plays “Garbh”, “Anhad Naad- Unheard Sounds of Universe” and “Nyaya ke Bhanwar me Bhawari”. Your meaningful and constructive engagement is expected. Because according to ‘Theatre of Relevance’ philosophy, audience is the first & foremost theatre person.





GARBH synopsis - To ensure that human remains humans performed the play "Garbh". This play gives a vivid description of the struggle of mankind and humanity; It is concerned with the challenges of leading a humanitarian life. It poses a question on human psychology and that invisible cocoon which is being woven around each and every one of us by nationalism, racism, religion, and caste system.

ANHAD NAAD - UNHEARD SOUNDS OF UNIVERSE synopsis - To liberate artists from the economic mechanism which makes them puppets, performed the play “AnhadNaad- Unheard sounds of Universe”. Drama is an artistic contemplation which is a process of understanding and examining art, the artistic needs of artists and fundamental artistic processes. Since art is not a commodity and artist is not a merchantand artist is not a balance sheet of profit and loss that is why this drama by liberating art and artist from commodity and commodification, inspires and ensures a better world through their positive, creative, and artistic energies.

NYAYE KE BHANWAR MEIN BHAWARI - Challenges the authority of patriarchy.

Classic plays “Garbh” and “Anhad Naad-Unheard Sounds of Universe” written and directed by Manjul Bharadwaj and starring Ashwini Nandedkar, Yogini Chowk, Sayali Pawaskar, Komal Khamkar, Tushar Mahske along with new play “Nyaya ke Bhanwar me Bhawari” starring well-known theatre actress Babli Rawat would be performed at Shivaji Mandir,Dadar (W) Mumbai at 11 AM on 15,16,17 November,2017 respectively !

#काल को गढ़ने वाले प्रसिद्ध नाटक “गर्भ” और “अनहद नाद –अनहर्ड साउंड्स ऑफ़ युनिवर्स” और “न्याय के भंवर में भंवरी” के मंचन से सजेगा “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस" का 25 वर्षीय मुंबई नाट्योत्सव!





थिएटर ऑफ़ रेलेवंस" नाट्य दर्शन के 25 वर्ष
15, 16, 17 नवम्बर, 2017 को
"मुम्बई में 3 दिवसीय नाट्य उत्सव

काल को चिंतन से गढ़ा और रचा जाता है.चिंतन आपके भीतर से सृजित होकर वैश्विक क्षितिज को पार कर विश्व में जीता है.कला मनुष्य को मनुष्य बनाती है. कलात्मक चिन्तन ही मनुष्य के विष को पीने की क्षमता रखता है.1990 के बाद का समय दुनिया के लिए अर्थहीन’ होने का दौर है.ये एकाधिकार और वर्चस्ववाद का दौर है.विज्ञान के सिद्धांतों का तकनीक तक सीमित होने का दौर है. आज खरीदने और बेचने का दौर है. मीडिया का जनता की बजाए सत्ता की वफ़ादारी का दौर है.ऐसे समय में जनता’ को अपने मुद्दों के लिएचिंतन’ और सरोकारों के एक मंच की जरूरत है. थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ रंग सिद्धांत 12 अगस्त,1992 से जनता के सरोकारों का चिंतन मंच’ बनकर कर उभरा है और 12 अगस्त,2017 को   अपने रंग दर्शन’  होने के 25 वर्ष पूर्ण कियें है. इन 25 वर्षों में थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ ने गलीचौराहोंगावोंआदिवासियोंकस्बों और महानगरों से होते हुए अपनी वैश्विक उड़ान भरी है और वैश्विक स्वीकार्यता हासिल की है.
थिएटर ऑफ़ रेलेवंस के सिद्धांत
1. ऐसा रंगकर्म जिसकी सृजनशीलता विश्व को मानवीय और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हो ।
2. कला कला के लिए ना होकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे । लोगों के जीवन का हिस्सा बने ।
3. जो मानवीय जरूरतों को पूरा करे और अपने आप को अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में उपलब्ध कराये ।
4. जो अपने आप को बदलाव के माध्यम के रूप में ढूंढे । अपने आप को खोजे और रचनात्मक बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाये ।
5. ऐसा रंगकर्म जो मनोरंजन की सीमाएँ तोड़कर जीवन जीने का ज़रिया या पद्धति बने ।
(“थिएटर ऑफ रेलेवेंस” नाट्य सिद्धांत का सूत्रपात सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल भारद्वाज" ने 12 अगस्त 1992 में किया और तब से उसका अभ्यास और क्रियान्वयन भारत और वैश्विक स्तर पर हो रहा है।)

आज विकास या विकास के नाम पर प्रकृति के विनाश के दौर में मनुष्य का मनुष्य बने रहना एक चुनौती है. नाटक गर्भ”, “अनहद नाद – Unheard Sounds of universe” औरन्याय के भंवर में भंवरी” के माध्यम से आपको अपने अंदर के इंसान की आवाज़ सुनाने के लिए मुंबई” में 15,16 और 17 नवम्बर, 2017 को 3 दिवसीय थिएटर ऑफ़ रेलेवंस - नाट्य उत्सव’ का आयोजन हो रहा है. आपकी सार्थक और रचनात्मक सहभागिता की अपेक्षा. क्योंकि थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ रंग सिद्दांत के अनुसार दर्शक’ पहला और सशक्तरंगकर्मी’ है !
  • नाटक गर्भ” मनुष्य के मनुष्य बने रहने का संघर्ष है.नाटक मानवता को बचाये रखने के लिए मनुष्य द्वारा अपने आसपास बनाये (नस्लवाद,धर्म,जाति,राष्ट्रवाद के) गर्भ को तोड़ता है. नाटक समस्याओं से ग्रसित मनुष्य और विश्व को इंसानियत के लिएइंसान बनने के लिए उत्प्रेरित करता है ..क्योकि खूबसूरत है ज़िन्दगी !
  •  नाटक अनहद नाद - अन हर्ड साउंड्स ऑफ़ युनिवर्स ” कलात्मक चिंतन हैजो कला और कलाकारों की कलात्मक आवश्यकताओं,कलात्मक मौलिक प्रक्रियाओं को समझने और खंगोलने की प्रक्रिया है। क्योंकि कला उत्पाद और कलाकार उत्पादक नहीं है और जीवन नफा और नुकसान की बैलेंस शीट नहीं है इसलिए यह नाटक कला और कलाकार को उत्पाद और उत्पादिकरण से उन्मुक्त करते हुएउनकी सकारात्मक,सृजनात्मक और कलात्मक उर्जा से बेहतर और सुंदर विश्व बनाने के लिए प्रेरित और प्रतिबद्ध करता है ।
  • नाटक न्याय के भंवर में भंवरी” शोषण और दमनकारी पितृसत्ता के खिलाफ़ न्यायसमता और समानता की हुंकार है !


मंजुल भारद्वाज लिखित एवम् निर्देशित और अश्विनी नांदेडकरयोगिनी चौकसायली पावसकर,कोमल खामकर,तुषार म्हस्के अभिनीत प्रसिद्ध नाटक गर्भ” और अनहद नाद अनहर्ड साउंड्स ऑफ़ युनिवर्स”  और जानी मानी रंग अभिनेत्री बबली रावत अभिनीत नाटक न्याय के भंवर में भंवरी” का मंचन  क्रमशः 15,16 और 1नवम्बर , 2017 को सुबह 11 बजे शिवाजी मन्दिर ,दादर (पश्चिम) मुंबई  में होगा !

‘Artists’ attain enlightenment through the radiance of their art and not through the cravings of their belly.-Manjul Bhardwaj

‘Artists’ attain enlightenment through the radiance of their art and not through the cravings of their belly. -         Manjul Bhard...