Tuesday, January 17, 2017

“ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” “कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धता” कार्यशाला

“ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ”
“कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धता”
कार्यशाला
21-25 जनवरी,2017
विश्वविख्यात रंग चिन्तक और “ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” नाट्य सिद्धांत के जनक मंजुल भारद्वाज “21-25 जनवरी,2017 तक होने वाली पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला कलाकार की कलात्मक चुनौतियां और प्रतिबद्धता को युसूफ मेहर अली सेंटर,पनवेल (मुंबई) में उत्प्रेरित करेंगें. “ थिएटर ऑफ़ रेलेवंस ” नाट्य सिद्धांत की स्वयं और समूह के आत्म अनुभव आधारित कलात्मक प्रक्रिया में सहभागी क्लासिक नाटक  "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe" से  अपनी कलात्मक चुनौतियां से रूबरू होकर उनके निवारण के लिए प्रकृति के सानिद्ध्य में अपने आपको खंगोलेगें और अपने अन्दर कलात्मक व्यक्तित्व को खोजते हुए अपनी कलात्मक प्रतिबद्धता का संकल्प लेगें !



"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स"
"
कलाकारंची कलात्मक आव्हानं आणि प्रतिबद्धता"
कार्यशाळा
२१ ते २५ जानेवारी २०१७
जागतिक रंगचिंतक आणि "थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" नाट्य सिद्धांताचे जनक मंजुल भारद्वाज २१ ते २५ जानेवारी २०१७ ह्या कालावधीत होणाऱ्या पाच दिवसीय निवासी कार्यशाळेत "कलाकारांच्या कलात्मक आव्हानांना  आणि प्रतिबद्धतेला " युसूफ मेहेर अली सेंटर, पनवेल ( मुंबई ) येथे उत्प्रेरित करतील . "थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" नाट्य सिद्धांताच्या स्वयं आणि समूहच्या आत्म अनुभव आधारित कलात्मक प्रक्रियेत सहभागी classic नाटक " अनहद नाद Unheard Sounds Of Universe ने आपल्या कलात्मक आव्हानांनसोबत एकरूप होऊन निसर्गाच्या सानिध्यात आत्ममंथन प्रक्रियेद्वारे त्याचे समाधान शोधतील आणि कलात्मक प्रतिबद्धतेचा संकल्प घेतील .



"Explore the Unheard of Art and Artist”

"Explore the Unheard of Art and Artist” 5 days residential Theatre Of Relevance Workshop from 21st  to 25th January 2017 at Yusuf Maherally Centre, Panvel. This artistic exploration workshop will be facilitated by internationally renowned theatre thinker Manjul Bhardwaj. Explore the artistic processes of body, mind and stage to understand and internalize the “Unheard of Art and Artist” through Theatre Of Relevance philosophy. In this residency participants will act as resource and explore the classic play "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe" to envision and explore themselves as performers on the stage of real life as well as on artistic stage by experiencing, applying and hypothesizing.


Thursday, January 12, 2017

Theatre of Relevance - An Artistic Movement !

"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" या तत्वज्ञानाचा आरंभ आणि सराव सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल भारद्वाज" यांनी 12 ऑगस्ट 1992 रोजी संपूर्ण जगभरात सुरु केला.
"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" तत्वानुसार, "प्रेक्षक" हा सर्वात सशक्त आणि पहिला रंगकर्मी आहे आणि त्यानंतर लेखक, दिगदर्शक आणि कलाकार.
"TOR" ची प्रक्रिया स्थापित रंगभूमीच्या मनोरंजनाची चौकट मोडून, रंगभूमी हि जगण्याचा सक्षम मार्ग आहे हे तत्व आणि दृष्टिकोन प्रेक्षकांमधे रुजवते. 
रंगभूमी हि सृजनात्मक बदल घडवून आणणारी प्रक्रिया आहे हे "TOR" ने आपल्या रचनात्मक आणि सकारात्मक प्रयोगांतून सिद्ध करून, संपूर्ण जगभरात क्रांतीचा ज्वालामुखी पेटवला आहे.
"थिएटर ऑफ रेलेव्हन्स" हे तत्व, "कलेसाठी कला" या भांडवलशाहीच्या संधीसाधु आणि पलायनवादी भूमिकेला नाकारून, प्रतिबद्ध आणि जबाबदार, सृजनात्मक उत्कृष्टतेला प्राधान्य देऊन, एका उत्तम आणि सुंदर अशा मानवी विश्वाची रचना करण्यासाठी प्रेरीत आणि प्रतिबद्ध करते.





 “थिएटर ऑफ रेलेवेंस नाट्य सिद्धांत का सूत्रपात ,अभ्यास और क्रियान्वयन  सुप्रसिद्ध रंगचिंतक, "मंजुल भारद्वाज"  12 अगस्त  1992 से वैश्विक स्तर पर कर रहे हैं . थिएटर ऑफ़ रेलेवंस  रंग सिद्धांत के अनुसार रंगकर्म निर्देशक और अभिनेता केन्द्रित  होने की बजाय दर्शक और लेखक केन्द्रित हो क्योंकि दर्शक सबसे बड़ा और शक्तिशाली रंगकर्मी है .
पूंजीवादी कलाकार कभी भी अपनी कलात्मक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं लेते इसलिए “कला कला के लिए” के चक्रव्यहू में फंसे हुए हैं और भोगवादी कला की चक्की में पिस कर ख़त्म हो जाते हैं .  थिएटर ऑफ़ रेलेवंस  ने “कला कला के लिए” वाली औपनिवेशिक और पूंजीवादी सोच के चक्रव्यहू को अपने तत्व और सार्थक प्रयोगों से तोड़ा (भेदा) है और दर्शक को जीवन को बेहतर और शोषण मुक्त बनाने वाली प्रतिबद्ध ,प्रगतिशील,समग्र और समर्पित रंग दृष्टी से जोड़ा है .
 थिएटर ऑफ़ रेलेवंस  अपने तत्व और सकारात्मक प्रयोगों से एक बेहतर , सुंदर और मानवीय विश्व के निर्माण के लिए सांस्कृतिक चेतना का निर्माण कर सांस्कृतिक क्रांति के लिए प्रतिबद्ध है !
 Theatre of Relevance (TOR) is a philosophy initiated & practiced by well known Theatre personality Manjul Bhardwaj since 12 August, 1992 in India and all over the world. Theatre of Relevance envisages audience as first, foremost & strongest theatre person and then writer, director, performer follows. TOR brings out theatre from the cocoons of Entertainment to a way of empowerment and sees theatre as a way of living. TOR has proved that theatre is a process of constructive change and a volcano of revolution with its experiments all over the world. TOR rubbishes capitalistic approach “art for art sake” as escapist & opportunistic and commits it`s creative excellence to make the world more “Better & Humane”.


Saturday, January 7, 2017

Performance of multilingual play by renowned Theatre thinker Manjul Bhardwaj "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe"






On 28 Janury,2017 (Saturday) 11 AM
Shivaji Mandir, Dadar (West), Mumbai


Art is an exploration…. ever evolving process of fine tuning the nuances of creativity to facilitate the life to be alive to make mankind as humane… ever evolving artistic process purifies human to find their purpose of life, to encourage and strengthen their belief in “Humane & Humanity” …
Artist is a creator &  commits entire creativity to art, to carves into an ever evolving & free flowing spirit of positivism…. dedicates this vision of ‘Emancipative Artistic Positivism” to the world and inspire the world to commit their energy to create a world which is  ‘better & Humane’….

Artist do not live to fill up their bellies but to make the life artistic, to connect the human life with nature, to create harmonious rhythm between mankind & nature… as the mankind disconnects itself from nature … it becomes self disruptive & suicidal ..Man destroys mankind … and today in the name of “development” .... Man is at its peak to destroy the nature & mankind …. Today everywhere is war, violence & exploitation … nature is crying for peace…Love & harmony… the market and consumerism has overpowered the art & artists and made them puppets…. robots to propagate the neo global policies of Globalization .. which are a direct threat to nature, it`s biodiversity and pluralism … converted mankind into a “buying & selling commodity” for profit, consumption & exploitation!

In this challenging time and nature`s cry one way is to be silent and doing nothing, only waiting for a miracle… instead of doing nothing …we the performers of “theatre of relevance” chose to perform "अनहद नाद Unheard sounds of Universe"... Premiered on 29 May 2015 in Ravindra Natya Mandir in Mumbai to liberate art & artists from productization.. .. Since then the dedicated “TOR” performers are enlightening the artistic fraternity & audiences through their emancipate performances…   
   
The play “अनहद नाद - Unheard sounds of Universe” is an exploration of artistic needs to emancipate art and artists from productization to commit their artistic creativity to make the world better and humane and not a profit and loss balance sheet of life. This formless play is conceived, designed, written & directed by internationally known theatre thinker and philosopher Manjul Bhardwaj.
Manjul Bhardwaj is a theatre person who responds to national challenges and sets national agenda through his philosophy "Theatre of relevance".
  

The artistic fraternity & audiences gave an overwhelming response to this artistic emancipative celebration… We invite you to experience this wonderful performance on 28 January, 2017 at 11 AM in Shivaji Mandir ,Dadar (w) Mumbai.


The dedicated & committed “TOR” performers Ashwini Nandedkar, Sayali Pawaskar,Komal Khamkar & Tushar Mhaske made possible to actualize this gigantic dream !

Friday, January 6, 2017

रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज द्वारा लिखित और निर्देशित बहुभाषिक नाटक "अनहद नाद - Unheard sounds of Universe" का मंचन”

शिवाजी मंदिर नाट्य मंदिर, 28 जनवरी ,2017 (शनिवार) को सुबह 11 बजे

कला एक खोज है ... निरंतर खोज ..जो कहीं रूकती नहीं है ..बस जीवन को लगातार जीवन और मनुष्यों को मनुष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध होती है उनको लगातार शुद्दिकरण की प्रक्रिया के अनुभव लोक की अनुभति से जीवन और मनुष्य के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए... इंसान और इंसानियत का बोध और निर्माण करते हुए... कलाकार साधक हैं  ..जो अपनी कला साधना से तपाता है अपने आप को और एक खोजी रूह की अनंत खोज में स्वयं समर्पित कर विश्व को अपनी कला से रचनात्मक दृष्टि देकर प्रेरित करतें हैं ... 

कलाकार मात्र अपना पेट भरने के लिए कलाकार नहीं होता अपितु मानव के जीवन को कलात्मक और प्रकृति की लय और ताल से जोड़ते हैं ..क्योंकि ये प्राकृतिक लय और ताल जब टूटते हैं तो मनुष्य विध्वंसक होकर अपने आप को नष्ट करता है ... आज मनुष्य अपने इसी विध्वंसक रूप के चरम पर बैठा है और अपनी चालाकी से उसे विकास कह रहा है ...जबकि चारों और हिंसा और हाहाकार है .. 

कला और कलाकारों को बाज़ार ने अपने चुंगल में जकड़ कर कठपुतली बना लिया है ..और उन्हें मात्र एक बिकाऊ वस्तु के रूप में जनमानस में परोस रहा है टाइम पास और उपभोग के लिए ... ऐसे चुनौतीपूर्ण काल में अफ़सोस कर ...बैठने की बजाय हमने कला एक वस्तु ..उत्पाद नहीं है और कलाकार कोई उत्पाद का कारखाना नहीं है .. कला और कलाकार की उन्मुक्तता पर नाटक लिखा "अनहद नाद Unheard sounds of Universe"... जिसका २९ मई २०१५ को मुंबई के रविन्द्र नाट्य मंदिर में प्रथम मंचन से दर्शकों को लोकार्पित किया और तब से अब तक इसका प्रदर्शन निरंतर हो रहा है और दर्शकों का प्रेम और प्रगाड़ हो रहा है ...

इस कलात्मक मंचन में आप सब सादर आमंत्रित है 28 जनवरी ,2017 (शनिवार) को सुबह 11 बजे मुंबई के शिवाजी मंदिर नाट्य मंदिर  में....
प्रिय दर्शको .. इस सफलता को अर्जित करने वाले कलासाधक हैं ... अश्विनी नांदेडकर सायली पावसकर,तुषार म्हस्के, और  कोमल खामकर ..इन कलासाधकों ने अपने अथक और कलात्मक साधना से इस दिव्य स्वप्न को साकार किया है ...
एक्सपेरिमेंटल थिएटर फाउंडेशन विगत २५ वर्षों से देश विदेश में अपनी प्रोयोगात्मक , सार्थक और प्रतिबद्ध प्रस्तुतियों के लिए विख्यात है सम्पर्क  9820391859,ईमेल – etftor@gmail.com











‘Artists’ attain enlightenment through the radiance of their art and not through the cravings of their belly.-Manjul Bhardwaj

‘Artists’ attain enlightenment through the radiance of their art and not through the cravings of their belly. -         Manjul Bhard...