कदम जो चले थे
विलुप्त हो गए
छोड़ गए पदचिह्न
सदियों तक
पीढ़ियों के लिए
क्या थे वो पदचिह्न ?
जो अमर हो गए !
                              .... मंजुल भारद्वाज

Comments

Popular posts from this blog

“तत्व,व्यवहार,प्रमाण और सत्व” की चतुर्भुज को जो साधता है वो है...क्रिएटर” – मंजुल भारद्वाज (रंग चिन्तक )

“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य सिद्धांत पर आधारित लिखे और खेले गए नाटकों के बारे में- भाग - 5.. आज का नाटक है “मैं औरत हूँ!”